गांठ कितने समय तक रहती है?HealthPlanet

Posted on Thu 8th Dec 2022 : 09:19

गांठ बन गई और दर्द नहीं तो.... ब्रेस्ट कैंसर को पहचानिए, पढ़िए लक्षण से लेकर इलाज तक की हर बात

ब्रेस्ट कैंसर के बारे में कई भ्रांतिया हैं। कुछ लोग ऐसा समझते हैं कि ब्रेस्ट कैंसर जेनेटिक ही ज्यादा होता है यानी परिवार में मां या बहन के अलावा दादी-नानी या मौसी, बुआ को हुआ तभी हो सकता है। अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो यह भ्रम निकाल दीजिए। यहां एक्सपर्ट से समझिए इसके बारे में पूरी बात।


पहली स्टेज पर ही पता चल जाए तो मरीज 100 फीसदी ठीक हो जाता है
तीन तरह का हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर
टाइट या लूज ब्रा पहनने से ब्रेस्ट कैंसर हो जाएगा, यह मिथ है

पिछले दिनों एक्ट्रेस महिमा चौधरी का एक छोटा-सा विडियो सामने आया था। वीडियो में वह बता रही थीं कि उन्होंने अपना रुटीन चेकअप कराया था जिसमें ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) होने की आशंका जताई गई थी। इसके बाद कन्फर्म करने के लिए कुछ टेस्ट हुए और इलाज शुरू हुआ। शुरुआत में वह डर गई थीं, लेकिन अब हिम्मत से भरी हैं और यह जंग जीत रही हैं। यहां उनके कैंसर का जिक्र इसलिए किया गया क्योंकि बहुत-सी महिलाएं रुटीन चेकअप ही नहीं करवातीं। आंकड़ों के मुताबिक हमारे देश में कैंसर के 13 से 14 लाख मरीज सालाना सामने आते हैं। वहीं, हर 8 में से 1 महिला को ब्रेस्ट कैंसर होने की आशंका है। पहले यह कैंसर अमूमन 40 साल की उम्र के बाद होता था, लेकिन अब 20 साल बाद ही ऐसे कुछ मामले आ जाते हैं। कई बार कैंसर के लक्षण जल्दी नहीं उभरते। ऐसे में इलाज जल्दी शुरू नहीं हो पाता। ब्रेस्ट कैंसर ऐसा कैंसर है जिसका वक्त पर पता चले और इलाज शुरू हो जाए तो पूरी तरह ठीक हो सकते हैं। इसका पता कैसे लगाएं, इलाज और बचाव कैसा हो? जाने-माने एक्सपर्ट्स से बात करके जानकारी दे रही हैं


कैंसर शरीर में कैसे जगह बनाता है और कैसे इससे बचें:
हमारे शरीर में अरबों-खरबों कोशिकाएं या सेल्स होती हैं। शरीर के सभी अंग सेल से बने होते हैं जो लगातार डिवाइड होते रहते हैं। कैंसर की कोशिकाएं कहीं बाहर से नहीं आतीं। किसी खास अंग में कुछ सेल्स असामान्य हो जाते हैं या उद्देश्यहीन बढ़ने लगते हैं। कैंसर सेल्स में ये बदलाव आ जाता है कि ये इम्यून सिस्टम को चकमा देना सीख लेते हैं जबकि इम्यून सिस्टम ही हमें दुरुस्त रखता है। कह सकते हैं कि ये शरीर में आतंकवादी सेल्स बन जाते हैं और जहां जाते हैं वहीं आतंक मचाते हैं। ब्रेस्ट में यह कैंसर गांठ (ट्यूमर) के रूप में सामने आ सकता है। यह गांठ 2 तरह की हो सकती है: बिनाइन और मैलिग्नेंट। बिनाइन गाठ खतरनाक नहीं होती, जबकि मैलिग्नेंट गांठ कैंसर में बदल जाती है। इसका मतलब है कि वहां असामान्य कोशिकाएं बेकाबू होकर बढ़ रही हैं और दूसरे अंगों में भी पहुंच सकती हैं।


सबसे जरूरी बातें जान लीजिए

ब्रेस्ट कैंसर का जितना जल्दी पता चल जाए, उतना ही उसके ठीक होने के आसार बढ़ते हैं।
पीरियड्स के 7वें दिन सेल्फ एग्जामिनेशन करें।
20 साल की उम्र से हर महीने सेल्फ एग्जामिनेशन और 40 साल बाद सालाना रुटीन चेकअप - मैमोग्राम, अल्ट्रासाउंड आदि करवाएं।
पहली स्टेज पर ही पता चल जाए तो मरीज 100 फीसदी ठीक हो जाता है।
जल्दी पता चलने पर सर्जरी होती है तो ब्रेस्ट को हटाना नहीं पड़ता। छोटी गांठ या ट्यूमर को हटा देते हैं।
शुरुआत में ही पता लग जाए तो खर्च भी कम आता है।

क्या हैं इसके लक्षण

1. अगर कोई गांठ बन गई है और उसमें दर्द नहीं है तो कैंसर होने की आशंका ज्यादा है। दर्द है तो कैंसर की आशंका कम है। पीरियड्स के दिनों के आसपास भी ब्रेस्ट में गांठें बन जाती हैं, लेकिन उनमें दर्द होता है। ऐसे में चिंता की बात नहीं होती। ऐसी गांठें बनती हैं और कुछ दिनों में ठीक हो जाती हैं।
2. निपल से किसी तरह का खून जैसा रिसाव।
3. महिला प्रेग्नेंट न हो और बच्चे को ब्रेस्ट फीड भी न कराती हो लेकिन ब्रेस्ट से दूध या पानी जैसा डिस्चार्ज हो।
4. बिना वजन बढ़े, प्रेग्नेंट हुए ब्रेस्ट के साइज या शेप में बदलाव आ जाए।
5. ब्रेस्ट एक-दूसरे से दूसरी दिशा में जाने लगें या एक समान स्तर पर न रहें।

6. निपल अंदर की ओर धंसने लगे।
7. स्किन संतरे के छिलके जैसी होने लगे, खिंचाव हो या लाल हो जाए।

ब्रेस्ट कैंसर की वजहें
आमतौर पर लोग समझते हैं कि ब्रेस्ट कैंसर जेनेटिक ही ज्यादा होता है यानी परिवार में मां या बहन के अलावा दादी-नानी या मौसी, बुआ को हुआ हो तभी हो सकता है। लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। 10-15 फीसदी ब्रेस्ट कैंसर ही जेनेटिक हैं। यह पिता या मां के परिवार से आनुवंशिक तौर पर महिला या लड़की में आ सकता है। इतना ही नहीं, पुरुषों में भी यह कैंसर आ सकता है।

किसी महिला के परिवार में सगे रिश्तेदारों और मां या पिता की बहनों या उनकी मां को भी हुआ हो तो ब्रेस्ट कैंसर जीन टेस्ट (BRCA1 और BRCA2) करा लेना चाहिए। यह ब्लड टेस्ट हैं। अगर यह पॉजिटिव है तो ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क 40 फीसदी तक बढ़ जाता है। इतना ही नहीं, ओवरी कैंसर का रिस्क भी बढ़ जाता है। ये टेस्ट जिंदगी में एक ही बार कराने होते हैं। टेस्ट पॉजिटिव आता है तो डॉक्टर की सलाह से लाइफस्टाइल सुधार कर कैंसर की आशंका को कम किया जा सकता है।

खुद जांच करना है सबसे ज्यादा जरूरी
मेनोपॉज वाली महिलाएं हर महीने की कोई एक तारीख फिक्स कर सकती हैं। किसी का जन्मदिन 1 तारीख को होता है तो वे 1 तारीख को सेल्फ एग्जामिनेशन करें।

यह है सही तरीका

साबुन या शैंपू हाथों को चिकना करके ब्रेस्ट को प्रेस करके देखें। इससे छोटी गांठें भी महसूस कर सकती हैं।
हाथों से ब्रेस्ट को साइडों से दबाते हुए फिर बीच में प्रेस करें। इसके बाद बगल की ओर से भी दबाकर देखें।
अगर कोई गांठ महसूस होती है तो कुछ दिन उस पर नजर रखें। पीरियड्स के दौरान ब्रेस्ट में गांठें बन सकती हैं जो कुछ दिन में ठीक हो जाती हैं। यह चिंता की बात नहीं।
अगर कोई गांठ दर्द के साथ महसूस होती है तो ध्यान दें कि अगले दिन दर्द कम हो रहा है या बढ़ रहा है।
कोई गांठ बिना दर्द वाली है तो ज्यादा अलर्ट हो जाएं। अपनी गाइनेकॉलजिस्ट से बात करें।

मैमोग्रफी और अल्ट्रासाउंड
अगर अगर किसी के परिवार में यह बीमारी नहीं है तो वह 40 से 70 साल की उम्र तक सालाना जांच कराए। अगर ठोस ब्रेस्ट हों या उम्र कम है यानी 20 से 40 के बीच है तो मैमोग्रफी का रिजल्ट सही नहीं मिलता। ऐसे में अल्ट्रासाउंड किया जाता है। अगर कैंसर का जेनेटिक कनेक्शन है, बुआ, मौसी आदि को यानी ब्लड रिलेशन में किसी को 40 साल की उम्र में ब्रेस्ट कैंसर हुआ था तो उनसे 10 साल पहले यानी 30 की उम्र से ही स्क्रीनिंग शुरू कर देनी चाहिए। मैमोग्रफी में कोई भी असामान्य बात पता चलने पर आगे जांच की जाती है। मैमोग्राम में ग्रेड 1 से 3 तक सामान्य माना जा सकता है लेकिन 4 और 5 है तो बायोप्सी की जानी चाहिए।


मैमोग्रफी का खर्च सिंगल ब्रेस्ट करीब 1300 रुपये, दोनों 2300 रुपये (लगभग)

ये जांच भी जरूरी
MRI का खर्च: 5-6 हजार रुपये के आसपास
जेनेटिक टेस्टिंग: इसमें BRCA-1 और 2 शामिल हैं। खर्च: 10-15 हजार रुपये के आसपास। दोनों टेस्ट करीब 30 हजार रुपये
ब्रेस्ट से छोटा-सा टिश्यू निकाल कर जांच की जाती है। इसके लिए FNAC (Fine Needle Aspiration Cytology) टेस्ट कराएं। इस जांच में ब्रेस्ट के अंदर से बारीक सुई से थोड़ा-सा फ्लूइड लिया जाता है। इसके बाद जरूरत हुई तो Core needle biopsy (CNB) की जाती है। इसमें मोटी सुई का इस्तेमाल होता है।
FNAC - 4 से 5 हजार रुपये, CNB - 10-12 हजार रुपये

तीन तरह का हो सकता है यह कैंसर
बायोप्सी के बाद पता चलता है कि किस तरह का ब्रेस्ट कैंसर है:

1. हार्मोन डिपेंडेंट : शरीर में जितना एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन ज्यादा बनेगा, उसी हिसाब से ट्यूमर भी बढ़ता है। यह हार्मोन डिपेंडेंट होता है। करीब 60 फीसदी महिलाओं का कैंसर इसी तरह का होता है।

2. Her2 पॉजिटिव : ये ट्यूमर जल्दी बढ़ते हैं। हरटू पॉजिटिव में टारगेटेड थेरपी दी जाती है। लेकिन इसकी दवाएं महंगी होती हैं। सामान्य हरसेप्टिन का इंजेक्शन अब 12-14 हजार रुपये में आ जाता है। पहले यह करीब 1 लाख रुपये का था। करीब 15-20 फीसदी मामले ऐसे ही होते हैं।

3. ट्रिपल नेगेटिव: यह सबसे गंभीर कैंसर होता है। यह 30-40 की उम्र में होता है। बहुत जल्दी बढ़ता है। कीमो और रेडिएशन थेरपी के बाद भी इसके वापस आने की आशंका ज्यादा होती है। 15-20 फीसदी कैंसर इसी तरह के होते हैं।

कैंसर की अलग-अलग स्टेज
कैंसर कितना गंभीर है, इसका पता ग्रेड और स्टेज से चलता है। किस तरह का है, कितनी तेजी से फैलने वाला है।

स्टेज 1, माइल्ड : इसमें कैंसर सिर्फ ब्रेस्ट तक ही सीमित रहता है।
स्टेज 2, मॉडरेट : इसमें ब्रेस्ट से शुरू होकर बगल तक फैल जाता है।
स्टेज 3 और 4, गंभीर: तेजी से फैल सकता है। अगर ब्रेस्ट कैंसर लिवर, फेफड़ों या हड्डियों तक पहुंच गया है तो स्टेज 4 है।

इलाज शुरू करने से पहले
कैंसर स्पेशलिस्ट मरीज का इलाज तय करते हैं। थेरपी तय करते हैं। लिंफ नोड निकालना है या ब्रेस्ट, रेडियो थेरपी, कीमोथेरपी या हार्मोन थेरपी लेने की जरूरत है इसका फैसला उन्हें करना होता है।

ऐसे होता है इलाज
इस कैंसर का इलाज मल्टी-डिसिप्लिनरी होता है। इसका मतलब है कि कंबाइंड इलाज होता है। इसमें कीमोथेरपी, सर्जरी, टारगेटिड सर्जरी, रेडिएशन थेरपी सभी तरीकों का इस्तेमाल होता है। एक साथ कई एक्सपर्ट जैसे- सर्जन, मेडिकल ऑन्कॉलजिस्ट, रेडिएशन ऑन्कॉलजिस्ट मिलकर टीम बनाकर इलाज करते हैं।

रेडियोथेरपी: कैंसर के सेल मारने के लिए मशीन की मदद से ट्यूमर पर कंट्रोल्ड रेडिएशन डाला जाता है। एक दिन में करीब 15-20 मिनट और हफ्ते में 5 दिन तक रेडियोथेरपी की जाती है।

कीमोथेरपी: इसमें मरीज को दवाएं दी जाती हैं, जो कैंसर सेल को मारती हैं। लेकिन इसमें कैंसर के साथ-साथ नॉर्मल सेल को भी नुुकसान होता है।

सर्जरी दो तरह की होती है
1. ब्रेस्ट का उतना ही हिस्सा निकाला जाता है जितने में कैंसर हो।
2. पूरा ब्रेस्ट निकाला जाता है।

ब्रेस्ट कंजर्वेशन सर्जरी पर जोर : आजकल ब्रेस्ट कंजरवेशन सर्जरी की जाती है। अगर कैंसर फैल गया है तो कीमो देकर उस हिस्से को छोटा करके सर्जरी करते हैं। इसमें ब्रेस्ट को बचा दिया जाता है। अगर ब्रेस्ट का बड़ा हिस्सा निकाला गया तो शरीर के किसी और हिस्से से मसल या फैट लेकर वहां लगाया जाता है। अगर पूरा ब्रेस्ट निकाला गया हो तो ऑन्कॉप्लास्टी की जाती है। इसके लिए सिलिकॉन इंप्लांट्स आदि भी लगाए जाते हैं।
सिलिकॉन इंप्लांट : लगभग 8000 रुपये से 2.5 लाख रुपये तक


कब मानें कैंसर है खत्म
कैंसर का पता चलने के बाद ट्यूमर को खत्म किया जाता है। लेकिन इसके बाद भी यह आशंका दूर करने के लिए कि वह दूसरे ब्रेस्ट में न हो जाए आगे जांच की जाती है। अगर किसी भी स्टेज में मरीज को कैंसर-फ्री कह दिया जाए तो भी पांच साल तक फॉलोअप होता है। आगे कौन-सी जांच होंगी, यह डॉक्टर तय करते हैं। शुरू के 3-4 साल ज्यादा रिस्क रहता है। हार्मोन पॉजिटिव वाले केस में कई बार 10-15 साल बाद में भी इसके लौटने की आशंका रहती है। ट्रिपल नेगेटिव वाले केस में 3 साल तक वापस नहीं आता तो बाद में भी कैंसर होने की आशंका कम रहती है।

कैंसर खत्म होने के बाद जांच
दूसरे साल हर 3 महीने पर
तीसरे साल हर 4 महीने पर
चौथे साल हर 5 महीने पर
पांचवे साल में साल में 1 बार

अगर कोई कैंसर सेल नहीं मिलती तो माना जाता है कि वह कैंसर दोबारा नहीं होगा। लेकिन किसी दूसरी तरह के कैंसर के होने की आशंका खत्म करने के लिए रुटीन चेकअप कराते रहना चाहिए। साथ ही अपने डॉक्टर की सलाह माननी चाहिए।


ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े मिथ

महिलाओं की बीमारी है पुरुषों को नहीं होती।
टाइट या लूज ब्रा पहनने से ब्रेस्ट कैंसर हो जाएगा।
सिर्फ मोटी महिलाओं को होता है, पतली को नहीं।
किसी पेड़ के पत्तों को खाने से यह कैंसर दूर हो जाएगा।
कैंसर के मरीज का खून या शरीर की कोई चोट या जख्म छूने से कैंसर नहीं होता।
कैंसर डायबीटीज और हाई बीपी की तरह शरीर में खुद ही पैदा होनेवाली बीमारी है। यह किसी इन्फेक्शन से नहीं होती, जिसका इलाज एंटी-बायोटिक्स से हो सके।

बचाव के लिए ये कदम

लोगों के लिए अच्छा सोचें। मन को पॉजिटिव रखें।
अगर किसी की फैमिली हिस्ट्री ब्रेस्ट कैंसर की है तो लाइफस्टाइल जरूर सुधारें।
दूध और दूध से बनी चीजों का सीमित इस्तेमाल करें।
पहले दूध, दही, छाछ आदि होते थे लेकिन अब बटर, पनीर, चीज़, मेओनीज आदि कई तरह के प्रॉडक्ट भी इस्तेमाल हो रहे हैं। इसे कम करें।
किसी भी तरह का बेवजह केमिकल एक्सपोजर नहीं होना चाहिए। लेड, मर्करी वाली सस्ती लिपस्टिक आदि भी इसी दायरे में आती हैं।
रोजाना 45 मिनट एक्सरसाइज करें। ऑफिस में जहां तक मुमकिन हो सीढ़ियों का इस्तेमाल करें।
पेट और कमर पर चर्बी ज्यादा होगी तो ज्यादा एस्ट्रोजन का उत्पादन होता है। इसे घटाएं।
शादीशुदा महिलाएं कम से कम एक बच्चा होने दें। यह इनडायरेक्ट बचाव है।
बच्चे को ब्रेस्ट फीड जरूर कराएं। 6 महीने तक तो बच्चे को मां के दूध पर ही निर्भर रखा जाता है।
बेवजह हार्मोन सप्लिमेंट लेने से बचें। कुछ महिलाएं उम्रदराज होने पर झुर्रियों और ब्रेस्ट ढलने से बचने के लिए एस्ट्रोजन (फीमेल हार्मोन) लेती हैं। अगर सेक्सुअल प्लेजर के लिए भी हार्मोन लेती हैं तो ऐसे हार्मोन किसी डॉक्टर की पूरी देखरेख में ही लेने चाहिए। यूं ही किसी परिचित के कहने पर तो बिलकुल नहीं।


पुरुषों को भी यह कैंसर, लक्षण जान लीजिए
-कोई गांठ हो सकती है।
-एग्जिमा जैसा जख्म हो सकता है।
-निपल से कोई रिसाव हो सकता है।

solved 5
wordpress 3 years ago 5 Answer
--------------------------- ---------------------------
+22

Author -> Poster Name

Short info