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गांठबन गई और दरà¥à¤¦ नहीं तो.... बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ कैंसर को पहचानिà¤, पढ़िठलकà¥à¤·à¤£ से लेकर इलाज तक की हर बात
बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ कैंसर के बारे में कई à¤à¥à¤°à¤¾à¤‚तिया हैं। कà¥à¤› लोग à¤à¤¸à¤¾ समà¤à¤¤à¥‡ हैं कि बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ कैंसर जेनेटिक ही जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है यानी परिवार में मां या बहन के अलावा दादी-नानी या मौसी, बà¥à¤† को हà¥à¤† तà¤à¥€ हो सकता है। अगर आप à¤à¥€ à¤à¤¸à¤¾ सोचते हैं तो यह à¤à¥à¤°à¤® निकाल दीजिà¤à¥¤ यहां à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ से समà¤à¤¿à¤ इसके बारे में पूरी बात।
पहली सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ पर ही पता चल जाठतो मरीज 100 फीसदी ठीक हो जाता है
तीन तरह का हो सकता है बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ कैंसर
टाइट या लूज बà¥à¤°à¤¾ पहनने से बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ कैंसर हो जाà¤à¤—ा, यह मिथ है
पिछले दिनों à¤à¤•à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¸ महिमा चौधरी का à¤à¤• छोटा-सा विडियो सामने आया था। वीडियो में वह बता रही थीं कि उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपना रà¥à¤Ÿà¥€à¤¨ चेकअप कराया था जिसमें बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ कैंसर (Breast Cancer) होने की आशंका जताई गई थी। इसके बाद कनà¥à¤«à¤°à¥à¤® करने के लिठकà¥à¤› टेसà¥à¤Ÿ हà¥à¤ और इलाज शà¥à¤°à¥‚ हà¥à¤†à¥¤ शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में वह डर गई थीं, लेकिन अब हिमà¥à¤®à¤¤ से à¤à¤°à¥€ हैं और यह जंग जीत रही हैं। यहां उनके कैंसर का जिकà¥à¤° इसलिठकिया गया कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि बहà¥à¤¤-सी महिलाà¤à¤‚ रà¥à¤Ÿà¥€à¤¨ चेकअप ही नहीं करवातीं। आंकड़ों के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• हमारे देश में कैंसर के 13 से 14 लाख मरीज सालाना सामने आते हैं। वहीं, हर 8 में से 1 महिला को बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ कैंसर होने की आशंका है। पहले यह कैंसर अमूमन 40 साल की उमà¥à¤° के बाद होता था, लेकिन अब 20 साल बाद ही à¤à¤¸à¥‡ कà¥à¤› मामले आ जाते हैं। कई बार कैंसर के लकà¥à¤·à¤£ जलà¥à¤¦à¥€ नहीं उà¤à¤°à¤¤à¥‡à¥¤ à¤à¤¸à¥‡ में इलाज जलà¥à¤¦à¥€ शà¥à¤°à¥‚ नहीं हो पाता। बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ कैंसर à¤à¤¸à¤¾ कैंसर है जिसका वकà¥à¤¤ पर पता चले और इलाज शà¥à¤°à¥‚ हो जाठतो पूरी तरह ठीक हो सकते हैं। इसका पता कैसे लगाà¤à¤‚, इलाज और बचाव कैसा हो? जाने-माने à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿà¥à¤¸ से बात करके जानकारी दे रही हैं
कैंसर शरीर में कैसे जगह बनाता है और कैसे इससे बचें:
हमारे शरीर में अरबों-खरबों कोशिकाà¤à¤‚ या सेलà¥à¤¸ होती हैं। शरीर के सà¤à¥€ अंग सेल से बने होते हैं जो लगातार डिवाइड होते रहते हैं। कैंसर की कोशिकाà¤à¤‚ कहीं बाहर से नहीं आतीं। किसी खास अंग में कà¥à¤› सेलà¥à¤¸ असामानà¥à¤¯ हो जाते हैं या उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯à¤¹à¥€à¤¨ बढ़ने लगते हैं। कैंसर सेलà¥à¤¸ में ये बदलाव आ जाता है कि ये इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® को चकमा देना सीख लेते हैं जबकि इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® ही हमें दà¥à¤°à¥à¤¸à¥à¤¤ रखता है। कह सकते हैं कि ये शरीर में आतंकवादी सेलà¥à¤¸ बन जाते हैं और जहां जाते हैं वहीं आतंक मचाते हैं। बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ में यह कैंसर गांठ(टà¥à¤¯à¥‚मर) के रूप में सामने आ सकता है। यह गांठ2 तरह की हो सकती है: बिनाइन और मैलिगà¥à¤¨à¥‡à¤‚ट। बिनाइन गाठखतरनाक नहीं होती, जबकि मैलिगà¥à¤¨à¥‡à¤‚ट गांठकैंसर में बदल जाती है। इसका मतलब है कि वहां असामानà¥à¤¯ कोशिकाà¤à¤‚ बेकाबू होकर बढ़ रही हैं और दूसरे अंगों में à¤à¥€ पहà¥à¤‚च सकती हैं।
सबसे जरूरी बातें जान लीजिà¤
बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ कैंसर का जितना जलà¥à¤¦à¥€ पता चल जाà¤, उतना ही उसके ठीक होने के आसार बढ़ते हैं।
पीरियडà¥à¤¸ के 7वें दिन सेलà¥à¤« à¤à¤—à¥à¤œà¤¾à¤®à¤¿à¤¨à¥‡à¤¶à¤¨ करें।
20 साल की उमà¥à¤° से हर महीने सेलà¥à¤« à¤à¤—à¥à¤œà¤¾à¤®à¤¿à¤¨à¥‡à¤¶à¤¨ और 40 साल बाद सालाना रà¥à¤Ÿà¥€à¤¨ चेकअप - मैमोगà¥à¤°à¤¾à¤®, अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड आदि करवाà¤à¤‚।
पहली सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ पर ही पता चल जाठतो मरीज 100 फीसदी ठीक हो जाता है।
जलà¥à¤¦à¥€ पता चलने पर सरà¥à¤œà¤°à¥€ होती है तो बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ को हटाना नहीं पड़ता। छोटी गांठया टà¥à¤¯à¥‚मर को हटा देते हैं।
शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में ही पता लग जाठतो खरà¥à¤š à¤à¥€ कम आता है।
कà¥à¤¯à¤¾ हैं इसके लकà¥à¤·à¤£
1. अगर कोई गांठबन गई है और उसमें दरà¥à¤¦ नहीं है तो कैंसर होने की आशंका जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ है। दरà¥à¤¦ है तो कैंसर की आशंका कम है। पीरियडà¥à¤¸ के दिनों के आसपास à¤à¥€ बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ में गांठें बन जाती हैं, लेकिन उनमें दरà¥à¤¦ होता है। à¤à¤¸à¥‡ में चिंता की बात नहीं होती। à¤à¤¸à¥€ गांठें बनती हैं और कà¥à¤› दिनों में ठीक हो जाती हैं।
2. निपल से किसी तरह का खून जैसा रिसाव।
3. महिला पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚ट न हो और बचà¥à¤šà¥‡ को बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ फीड à¤à¥€ न कराती हो लेकिन बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ से दूध या पानी जैसा डिसà¥à¤šà¤¾à¤°à¥à¤œ हो।
4. बिना वजन बढ़े, पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚ट हà¥à¤ बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ के साइज या शेप में बदलाव आ जाà¤à¥¤
5. बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ à¤à¤•-दूसरे से दूसरी दिशा में जाने लगें या à¤à¤• समान सà¥à¤¤à¤° पर न रहें।
6. निपल अंदर की ओर धंसने लगे।
7. सà¥à¤•िन संतरे के छिलके जैसी होने लगे, खिंचाव हो या लाल हो जाà¤à¥¤
बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ कैंसर की वजहें
आमतौर पर लोग समà¤à¤¤à¥‡ हैं कि बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ कैंसर जेनेटिक ही जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है यानी परिवार में मां या बहन के अलावा दादी-नानी या मौसी, बà¥à¤† को हà¥à¤† हो तà¤à¥€ हो सकता है। लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। 10-15 फीसदी बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ कैंसर ही जेनेटिक हैं। यह पिता या मां के परिवार से आनà¥à¤µà¤‚शिक तौर पर महिला या लड़की में आ सकता है। इतना ही नहीं, पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में à¤à¥€ यह कैंसर आ सकता है।
किसी महिला के परिवार में सगे रिशà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥‹à¤‚ और मां या पिता की बहनों या उनकी मां को à¤à¥€ हà¥à¤† हो तो बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ कैंसर जीन टेसà¥à¤Ÿ (BRCA1 और BRCA2) करा लेना चाहिà¤à¥¤ यह बà¥à¤²à¤¡ टेसà¥à¤Ÿ हैं। अगर यह पॉजिटिव है तो बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ कैंसर का रिसà¥à¤• 40 फीसदी तक बढ़ जाता है। इतना ही नहीं, ओवरी कैंसर का रिसà¥à¤• à¤à¥€ बढ़ जाता है। ये टेसà¥à¤Ÿ जिंदगी में à¤à¤• ही बार कराने होते हैं। टेसà¥à¤Ÿ पॉजिटिव आता है तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह से लाइफसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² सà¥à¤§à¤¾à¤° कर कैंसर की आशंका को कम किया जा सकता है।
खà¥à¤¦ जांच करना है सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जरूरी
मेनोपॉज वाली महिलाà¤à¤‚ हर महीने की कोई à¤à¤• तारीख फिकà¥à¤¸ कर सकती हैं। किसी का जनà¥à¤®à¤¦à¤¿à¤¨ 1 तारीख को होता है तो वे 1 तारीख को सेलà¥à¤« à¤à¤—à¥à¤œà¤¾à¤®à¤¿à¤¨à¥‡à¤¶à¤¨ करें।
यह है सही तरीका
साबà¥à¤¨ या शैंपू हाथों को चिकना करके बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ को पà¥à¤°à¥‡à¤¸ करके देखें। इससे छोटी गांठें à¤à¥€ महसूस कर सकती हैं।
हाथों से बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ को साइडों से दबाते हà¥à¤ फिर बीच में पà¥à¤°à¥‡à¤¸ करें। इसके बाद बगल की ओर से à¤à¥€ दबाकर देखें।
अगर कोई गांठमहसूस होती है तो कà¥à¤› दिन उस पर नजर रखें। पीरियडà¥à¤¸ के दौरान बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ में गांठें बन सकती हैं जो कà¥à¤› दिन में ठीक हो जाती हैं। यह चिंता की बात नहीं।
अगर कोई गांठदरà¥à¤¦ के साथ महसूस होती है तो धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें कि अगले दिन दरà¥à¤¦ कम हो रहा है या बढ़ रहा है।
कोई गांठबिना दरà¥à¤¦ वाली है तो जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ अलरà¥à¤Ÿ हो जाà¤à¤‚। अपनी गाइनेकॉलजिसà¥à¤Ÿ से बात करें।
मैमोगà¥à¤°à¤«à¥€ और अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड
अगर अगर किसी के परिवार में यह बीमारी नहीं है तो वह 40 से 70 साल की उमà¥à¤° तक सालाना जांच कराà¤à¥¤ अगर ठोस बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ हों या उमà¥à¤° कम है यानी 20 से 40 के बीच है तो मैमोगà¥à¤°à¤«à¥€ का रिजलà¥à¤Ÿ सही नहीं मिलता। à¤à¤¸à¥‡ में अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड किया जाता है। अगर कैंसर का जेनेटिक कनेकà¥à¤¶à¤¨ है, बà¥à¤†, मौसी आदि को यानी बà¥à¤²à¤¡ रिलेशन में किसी को 40 साल की उमà¥à¤° में बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ कैंसर हà¥à¤† था तो उनसे 10 साल पहले यानी 30 की उमà¥à¤° से ही सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨à¤¿à¤‚ग शà¥à¤°à¥‚ कर देनी चाहिà¤à¥¤ मैमोगà¥à¤°à¤«à¥€ में कोई à¤à¥€ असामानà¥à¤¯ बात पता चलने पर आगे जांच की जाती है। मैमोगà¥à¤°à¤¾à¤® में गà¥à¤°à¥‡à¤¡ 1 से 3 तक सामानà¥à¤¯ माना जा सकता है लेकिन 4 और 5 है तो बायोपà¥à¤¸à¥€ की जानी चाहिà¤à¥¤
मैमोगà¥à¤°à¤«à¥€ का खरà¥à¤š सिंगल बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ करीब 1300 रà¥à¤ªà¤¯à¥‡, दोनों 2300 रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ (लगà¤à¤—)
ये जांच à¤à¥€ जरूरी
MRI का खरà¥à¤š: 5-6 हजार रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ के आसपास
जेनेटिक टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤‚ग: इसमें BRCA-1 और 2 शामिल हैं। खरà¥à¤š: 10-15 हजार रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ के आसपास। दोनों टेसà¥à¤Ÿ करीब 30 हजार रà¥à¤ªà¤¯à¥‡
बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ से छोटा-सा टिशà¥à¤¯à¥‚ निकाल कर जांच की जाती है। इसके लिठFNAC (Fine Needle Aspiration Cytology) टेसà¥à¤Ÿ कराà¤à¤‚। इस जांच में बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ के अंदर से बारीक सà¥à¤ˆ से थोड़ा-सा फà¥à¤²à¥‚इड लिया जाता है। इसके बाद जरूरत हà¥à¤ˆ तो Core needle biopsy (CNB) की जाती है। इसमें मोटी सà¥à¤ˆ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² होता है।
FNAC - 4 से 5 हजार रà¥à¤ªà¤¯à¥‡, CNB - 10-12 हजार रà¥à¤ªà¤¯à¥‡
तीन तरह का हो सकता है यह कैंसर
बायोपà¥à¤¸à¥€ के बाद पता चलता है कि किस तरह का बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ कैंसर है:
1. हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ डिपेंडेंट : शरीर में जितना à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ और पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤¨ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बनेगा, उसी हिसाब से टà¥à¤¯à¥‚मर à¤à¥€ बढ़ता है। यह हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ डिपेंडेंट होता है। करीब 60 फीसदी महिलाओं का कैंसर इसी तरह का होता है।
2. Her2 पॉजिटिव : ये टà¥à¤¯à¥‚मर जलà¥à¤¦à¥€ बढ़ते हैं। हरटू पॉजिटिव में टारगेटेड थेरपी दी जाती है। लेकिन इसकी दवाà¤à¤‚ महंगी होती हैं। सामानà¥à¤¯ हरसेपà¥à¤Ÿà¤¿à¤¨ का इंजेकà¥à¤¶à¤¨ अब 12-14 हजार रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ में आ जाता है। पहले यह करीब 1 लाख रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ का था। करीब 15-20 फीसदी मामले à¤à¤¸à¥‡ ही होते हैं।
3. टà¥à¤°à¤¿à¤ªà¤² नेगेटिव: यह सबसे गंà¤à¥€à¤° कैंसर होता है। यह 30-40 की उमà¥à¤° में होता है। बहà¥à¤¤ जलà¥à¤¦à¥€ बढ़ता है। कीमो और रेडिà¤à¤¶à¤¨ थेरपी के बाद à¤à¥€ इसके वापस आने की आशंका जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है। 15-20 फीसदी कैंसर इसी तरह के होते हैं।
कैंसर की अलग-अलग सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ
कैंसर कितना गंà¤à¥€à¤° है, इसका पता गà¥à¤°à¥‡à¤¡ और सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ से चलता है। किस तरह का है, कितनी तेजी से फैलने वाला है।
सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ 1, माइलà¥à¤¡ : इसमें कैंसर सिरà¥à¤« बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ तक ही सीमित रहता है।
सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ 2, मॉडरेट : इसमें बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ से शà¥à¤°à¥‚ होकर बगल तक फैल जाता है।
सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ 3 और 4, गंà¤à¥€à¤°: तेजी से फैल सकता है। अगर बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ कैंसर लिवर, फेफड़ों या हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ तक पहà¥à¤‚च गया है तो सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ 4 है।
इलाज शà¥à¤°à¥‚ करने से पहले
कैंसर सà¥à¤ªà¥‡à¤¶à¤²à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ मरीज का इलाज तय करते हैं। थेरपी तय करते हैं। लिंफ नोड निकालना है या बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ, रेडियो थेरपी, कीमोथेरपी या हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ थेरपी लेने की जरूरत है इसका फैसला उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ करना होता है।
à¤à¤¸à¥‡ होता है इलाज
इस कैंसर का इलाज मलà¥à¤Ÿà¥€-डिसिपà¥à¤²à¤¿à¤¨à¤°à¥€ होता है। इसका मतलब है कि कंबाइंड इलाज होता है। इसमें कीमोथेरपी, सरà¥à¤œà¤°à¥€, टारगेटिड सरà¥à¤œà¤°à¥€, रेडिà¤à¤¶à¤¨ थेरपी सà¤à¥€ तरीकों का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² होता है। à¤à¤• साथ कई à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ जैसे- सरà¥à¤œà¤¨, मेडिकल ऑनà¥à¤•ॉलजिसà¥à¤Ÿ, रेडिà¤à¤¶à¤¨ ऑनà¥à¤•ॉलजिसà¥à¤Ÿ मिलकर टीम बनाकर इलाज करते हैं।
रेडियोथेरपी: कैंसर के सेल मारने के लिठमशीन की मदद से टà¥à¤¯à¥‚मर पर कंटà¥à¤°à¥‹à¤²à¥à¤¡ रेडिà¤à¤¶à¤¨ डाला जाता है। à¤à¤• दिन में करीब 15-20 मिनट और हफà¥à¤¤à¥‡ में 5 दिन तक रेडियोथेरपी की जाती है।
कीमोथेरपी: इसमें मरीज को दवाà¤à¤‚ दी जाती हैं, जो कैंसर सेल को मारती हैं। लेकिन इसमें कैंसर के साथ-साथ नॉरà¥à¤®à¤² सेल को à¤à¥€ नà¥à¥à¤•सान होता है।
सरà¥à¤œà¤°à¥€ दो तरह की होती है
1. बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ का उतना ही हिसà¥à¤¸à¤¾ निकाला जाता है जितने में कैंसर हो।
2. पूरा बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ निकाला जाता है।
बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ कंजरà¥à¤µà¥‡à¤¶à¤¨ सरà¥à¤œà¤°à¥€ पर जोर : आजकल बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ कंजरवेशन सरà¥à¤œà¤°à¥€ की जाती है। अगर कैंसर फैल गया है तो कीमो देकर उस हिसà¥à¤¸à¥‡ को छोटा करके सरà¥à¤œà¤°à¥€ करते हैं। इसमें बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ को बचा दिया जाता है। अगर बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ का बड़ा हिसà¥à¤¸à¤¾ निकाला गया तो शरीर के किसी और हिसà¥à¤¸à¥‡ से मसल या फैट लेकर वहां लगाया जाता है। अगर पूरा बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ निकाला गया हो तो ऑनà¥à¤•ॉपà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¥€ की जाती है। इसके लिठसिलिकॉन इंपà¥à¤²à¤¾à¤‚टà¥à¤¸ आदि à¤à¥€ लगाठजाते हैं।
सिलिकॉन इंपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट : लगà¤à¤— 8000 रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ से 2.5 लाख रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ तक
कब मानें कैंसर है खतà¥à¤®
कैंसर का पता चलने के बाद टà¥à¤¯à¥‚मर को खतà¥à¤® किया जाता है। लेकिन इसके बाद à¤à¥€ यह आशंका दूर करने के लिठकि वह दूसरे बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ में न हो जाठआगे जांच की जाती है। अगर किसी à¤à¥€ सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ में मरीज को कैंसर-फà¥à¤°à¥€ कह दिया जाठतो à¤à¥€ पांच साल तक फॉलोअप होता है। आगे कौन-सी जांच होंगी, यह डॉकà¥à¤Ÿà¤° तय करते हैं। शà¥à¤°à¥‚ के 3-4 साल जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ रिसà¥à¤• रहता है। हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ पॉजिटिव वाले केस में कई बार 10-15 साल बाद में à¤à¥€ इसके लौटने की आशंका रहती है। टà¥à¤°à¤¿à¤ªà¤² नेगेटिव वाले केस में 3 साल तक वापस नहीं आता तो बाद में à¤à¥€ कैंसर होने की आशंका कम रहती है।
कैंसर खतà¥à¤® होने के बाद जांच
दूसरे साल हर 3 महीने पर
तीसरे साल हर 4 महीने पर
चौथे साल हर 5 महीने पर
पांचवे साल में साल में 1 बार
अगर कोई कैंसर सेल नहीं मिलती तो माना जाता है कि वह कैंसर दोबारा नहीं होगा। लेकिन किसी दूसरी तरह के कैंसर के होने की आशंका खतà¥à¤® करने के लिठरà¥à¤Ÿà¥€à¤¨ चेकअप कराते रहना चाहिà¤à¥¤ साथ ही अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह माननी चाहिà¤à¥¤
बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ कैंसर से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ मिथ
महिलाओं की बीमारी है पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ को नहीं होती।
टाइट या लूज बà¥à¤°à¤¾ पहनने से बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ कैंसर हो जाà¤à¤—ा।
सिरà¥à¤« मोटी महिलाओं को होता है, पतली को नहीं।
किसी पेड़ के पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ को खाने से यह कैंसर दूर हो जाà¤à¤—ा।
कैंसर के मरीज का खून या शरीर की कोई चोट या जखà¥à¤® छूने से कैंसर नहीं होता।
कैंसर डायबीटीज और हाई बीपी की तरह शरीर में खà¥à¤¦ ही पैदा होनेवाली बीमारी है। यह किसी इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ से नहीं होती, जिसका इलाज à¤à¤‚टी-बायोटिकà¥à¤¸ से हो सके।
बचाव के लिठये कदम
लोगों के लिठअचà¥à¤›à¤¾ सोचें। मन को पॉजिटिव रखें।
अगर किसी की फैमिली हिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€ बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ कैंसर की है तो लाइफसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² जरूर सà¥à¤§à¤¾à¤°à¥‡à¤‚।
दूध और दूध से बनी चीजों का सीमित इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें।
पहले दूध, दही, छाछ आदि होते थे लेकिन अब बटर, पनीर, चीज़, मेओनीज आदि कई तरह के पà¥à¤°à¥‰à¤¡à¤•à¥à¤Ÿ à¤à¥€ इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² हो रहे हैं। इसे कम करें।
किसी à¤à¥€ तरह का बेवजह केमिकल à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¥‹à¤œà¤° नहीं होना चाहिà¤à¥¤ लेड, मरà¥à¤•री वाली ससà¥à¤¤à¥€ लिपसà¥à¤Ÿà¤¿à¤• आदि à¤à¥€ इसी दायरे में आती हैं।
रोजाना 45 मिनट à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ करें। ऑफिस में जहां तक मà¥à¤®à¤•िन हो सीढ़ियों का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें।
पेट और कमर पर चरà¥à¤¬à¥€ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होगी तो जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ होता है। इसे घटाà¤à¤‚।
शादीशà¥à¤¦à¤¾ महिलाà¤à¤‚ कम से कम à¤à¤• बचà¥à¤šà¤¾ होने दें। यह इनडायरेकà¥à¤Ÿ बचाव है।
बचà¥à¤šà¥‡ को बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ फीड जरूर कराà¤à¤‚। 6 महीने तक तो बचà¥à¤šà¥‡ को मां के दूध पर ही निरà¥à¤à¤° रखा जाता है।
बेवजह हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ सपà¥à¤²à¤¿à¤®à¥‡à¤‚ट लेने से बचें। कà¥à¤› महिलाà¤à¤‚ उमà¥à¤°à¤¦à¤°à¤¾à¤œ होने पर à¤à¥à¤°à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ ढलने से बचने के लिठà¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ (फीमेल हारà¥à¤®à¥‹à¤¨) लेती हैं। अगर सेकà¥à¤¸à¥à¤…ल पà¥à¤²à¥‡à¤œà¤° के लिठà¤à¥€ हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ लेती हैं तो à¤à¤¸à¥‡ हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ किसी डॉकà¥à¤Ÿà¤° की पूरी देखरेख में ही लेने चाहिà¤à¥¤ यूं ही किसी परिचित के कहने पर तो बिलकà¥à¤² नहीं।
पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ को à¤à¥€ यह कैंसर, लकà¥à¤·à¤£ जान लीजिà¤
-कोई गांठहो सकती है।
-à¤à¤—à¥à¤œà¤¿à¤®à¤¾ जैसा जखà¥à¤® हो सकता है।
-निपल से कोई रिसाव हो सकता है।
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